आज घर बड़े हो गये हैं परिवार छोटा ।
हम खर्च बहुत करते हैं पर हमारे पास 'ख़ास ' कुछ नहीं होता । ।
डिग्रियां हैं पर समझ नहीं ,
तर्क बहुत होता है पर सही निर्णय कम या बहुत कम होतें हैं ।
आज की सबसे बड़ी बाधा है कि सही आदमी न्याय के लिए भटक रहा है । न्याय भी बिकने लगा है । सुनने या पढने में बुरा लगता है और यह हमारे देश कि न्याय पालिका कि गरिमा का सवाल है पर यही सच है ।
कोई पीड़ित है तो गरीब और छोटा होने के कारण कोई अधिकारी उसकी नहीं सुनता । नेता जो जनता के हित के लिए चुन कर आते है वो भी गलत और सही नहीं देखना चाहते वो केवल अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में रहते है
आज लोग घर बड़ा बनातें है पर परिवार बहुत छोटा हो गया है । आज का इंसान प्रार्थना करना नहीं जानता है । परन्तु कामना बहुत रखता है । जीवन यापन तो हो जाता है पर लेकिन जिन्दगी जीना क्या है वो नहीं जानता ।
हमारे पास ग्रंथों का भण्डार है पर सीखतें नहीं ,जानते नहीं ।
आज का आदमी नफरत बहुत जल्दी सीख लेता है प्यार नहीं ।
Saturday, 14 August 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment